Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
मà¥à¤à¥‡ कैसे पता चलेगा कि शिशॠने à¤à¤° पेट सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कर लिया है?
आपको इस बारे में हर बार शायद ही पता चले! कà¤à¥€-कà¤à¥€ आप इसका गलत अंदाजा à¤à¥€ लगा सकती हैं। आपको लगेगा कि शिशॠने पेट à¤à¤°à¤•र दूध पी लिया है, वह संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ है और उसे नींद आ रही है। मगर, जैसे ही आप उसे अपने सà¥à¤¤à¤¨ से हटाà¤à¤‚गी, वह उठजाà¤à¤—ा और फिर से दूध की मांग करने लगता है।
या फिर हो सकता है कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बाद शिशॠअपने पालने या कॉट में सो रहा हो और आपको लगता है कि उसका पेट à¤à¤° गया है। मगर, थोड़ी ही देर में वह उठकर रोने लगता है। जब आप उसे दोबारा सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने लगती हैं, तो वह आपको सच में à¤à¥‚खा लगता है।
वासà¥à¤¤à¤µ में, इन सब बातों से कोई फरà¥à¤• नहीं पड़ता। शिशॠको कितनी देर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना चाहिà¤, इस बारे में शिशॠसे बेहतर कोई नहीं बता सकता। हालांकि, शिशॠसमय तो नहीं बता सकता। शिशॠकी सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने की अवधि का उसकी सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने की मातà¥à¤°à¤¾ से कोई खास लेना-देना नहीं है। अगर, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की अवधि और मातà¥à¤°à¤¾ के बीच कोई संबंध हो, तो à¤à¥€ हमारे पास यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि शिशॠको किसी à¤à¤• समय पर कितना दूध चाहिà¤à¥¤
अपने शिशॠको पहले à¤à¤• सà¥à¤¤à¤¨ से दूध समापà¥à¤¤ करने दें। इसका मतलब है कि जितनी देर तक वह चाहे, उसे उतनी देर तक à¤à¤• सà¥à¤¤à¤¨ से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने दें। अगर, वह सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही सà¥à¤¤à¤¨ छोड़ दे और उनींदा पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ हो, तो इस समय को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• अंतराल के रूप में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
शिशॠको थोड़ा ऊंचा उठाकर या कंधे से लगाकर डकार दिलाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। आप उसकी पीठà¤à¥€ सहला सकती हैं। वह डकार ले à¤à¥€ सकता है और नहीं à¤à¥€, इससे कोई फरà¥à¤• नहीं पड़ता।
अगर, वह अà¤à¥€ à¤à¥€ उनींदा लगे, तो आप उसे थोड़ा जगाने के लिठउसकी लंगोट (नैपी) बदल सकती हैं। उसके बाद, उसे दूसरे सà¥à¤¤à¤¨ से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराà¤à¤‚। जरà¥à¤°à¥€ नहीं है कि वह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करना चाहे। अगर, वह नहीं करता है, तो उसे सोने दें। अगली बार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ उस दूसरे सà¥à¤¤à¤¨ से ही करना शà¥à¤°à¥ करें, जिससे पहले नहीं कराया था।
इस तरह अपने शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की गति निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने देने का मतलब है कि आप उसे सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के अंत में आने वाला वसा समृदà¥à¤§ पिछला दूध पीने में मदद कर रही हैं।
आप शायद पाà¤à¤‚गी कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करते हà¥à¤ अंत में शिशॠका सà¥à¤¤à¤¨ चूसने का तरीका बदल जाता है। वह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार तेजी से चूसता है और बीच में कà¤à¥€-कà¤à¥€ निगलता है। वसा समृदà¥à¤§ दूध गाढ़ा होता है, इसलिठनिपà¥à¤ªà¤² से दूध निकालने के लिठचूसने में शिशॠको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मेहनत करनी पड़ती है। शिशॠकी मरà¥à¤œà¥€ के बिना उसे सà¥à¤¤à¤¨ से हटा देने का मतलब है कि उसे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध नहीं मिल पाया है।
अगर, आप अकà¥à¤¸à¤° यह à¤à¥‚ल जाती हैं कि आपने पिछली बार शिशॠको कौन से सà¥à¤¤à¤¨ से दूध पिलाया था, तो आप अंतर पता करने के लिठअपनी कलाई पर कोई खास बैंड, चूड़ी या बà¥à¤°à¥ˆà¤¸à¤²à¥‡à¤Ÿ पहन सकती हैं। जब à¤à¥€ आप à¤à¤• तरफ से दूध पिलाना समापà¥à¤¤ करें, तो वह बैंड अपनी दूसरी कलाई में पहन लें।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि शिशॠकी à¤à¥‚ख हर दिन अलग हो सकती है और उसकी à¤à¥‚ख दूसरे शिशॠसे à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ à¤à¥€ हो सकती है। इसलिठमां के तौर पर यह महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कि आप शिशॠके संकेतों को पहचानें और उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दें।
कà¥à¤› दिनों में आप अपने शिशॠकी दिनचरà¥à¤¯à¤¾ को समà¤à¤¨à¥‡ लगेंगी और यह पता लगा पाà¤à¤‚गी कि कब उसका पेट à¤à¤° चà¥à¤•ा है। इस बात का निरà¥à¤£à¤¯ इससे न करें कि शिशॠकितनी देर तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करता है। कà¥à¤› शिशॠकाफी सारा दूध तेजी से निकाल पाने में सकà¥à¤·à¤® होते हैं, वहीं दूसरों को इसमें थोड़ा समय लगता है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि यदि आपका शिशॠपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध पी रहा है, तो उसकी काफी सारी नैपी गीली होंगी। 24 घंटों में कम से कम छह गीली लंगोट होनी चाहिà¤à¥¤ यदि आपका शिशॠसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ लगे, अचà¥à¤›à¥‡ से सोठऔर उसका वजन à¤à¥€ लगातार बढ़ रहा है, तो चिंता वाली कोई बात नहीं होती। बेहतर है कि आप केवल à¤à¤• बार के सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ को लेकर न सोचें, बलà¥à¤•ि à¤à¤• समगà¥à¤° रूप में इसे देखें।
फलता-फूलता शिशॠजगे होने पर काफी सचेत और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ देने वाला होता है। उनकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग और मसल टोन अचà¥à¤›à¥€ होगी, वे à¤à¥‚ख लगने पर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की मांग करेंगे और दूध पी लेने के बाद संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ दिखाई देंगे।
इन सबके बावजूद, यदि आपको अपने शिशॠके सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने के तरीके और विकास को लेकर कà¥à¤› शंकाà¤à¤‚ हैं, तो अपनी परख पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ रखें। आप वह इंसान हैं, जो अपने शिशॠको सबसे बेहतर ढंग से जानती हैं, और उसके वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में जरा à¤à¥€ बदलाव आने पर आप तà¥à¤°à¤‚त पहचान सकेंगी। यदि आप चिंतित हों और समठन पा रही हों कि यह कà¥à¤¯à¤¾ है, तो शिशॠके डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
| --------------------------- | --------------------------- |